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धनतेरस 2026: तिथि और पूजा मुहूर्त

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
तारीखशुक्रवार, 6 नवंबर 2026
प्रदोष काल, यम दीपदानशाम 5:42 – रात 8:18
धनतेरस पूजा मुहूर्तशाम 6:17 – रात 8:15
ख़रीदारी के चौघड़िया (शुभ)दोपहर 12:11 – दोपहर 1:34
ख़रीदारी के चौघड़िया (चर)शाम 4:20 – शाम 5:42
ख़रीदारी के चौघड़िया (लाभ)रात 8:57 – रात 10:34

समय उज्जैन के लिए IST में हैं।

इस पेज पर: धनतेरस का महत्व · धनतेरस की कथा · घर पर धनतेरस पूजा कैसे करें · धनतेरस पूजा सामग्री · क्षेत्रीय परंपराएँ · धनतेरस पर क्या ख़रीदें · धनतेरस पर क्या न ख़रीदें · यम दीपदान · धनतेरस की तिथियाँ · अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस 2026: 6 या 7 नवंबर?

धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। उज्जैन में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में रहती है। 7 नवंबर को यह सुबह 10:48 बजे, सूर्यास्त से पहले, समाप्त हो जाती है।

धनतेरस के बारे में

धनतेरस, धन्वंतरि जयंती है — वह दिन जब विष्णु के वैद्य अवतार समुद्र मंथन से अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को पड़ने वाला यह पर्व दीपावली के पाँच दिनों की शुरुआत करता है। इस दिन मृत्यु के देवता यम की ओर मुख करके दीपक जलाया जाता है।

धनतेरस का महत्व

धनतेरस का नाम दो शब्दों से बना है: धन और तेरस, यानी त्रयोदशी। यह पर्व दिवाली से ठीक पहले के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पड़ता है और पाँच दिन के दीपोत्सव का पहला दिन है। बहुत से घरों में दिवाली के पहले दीये इसी शाम जलाए जाते हैं और रातभर जलते रहते हैं।

इस दिन जिस धन की पूजा होती है, वह केवल रुपया-पैसा नहीं है। देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के अधिष्ठाता भगवान धन्वंतरि की पूजा भी इसी तिथि को होती है, इसलिए अच्छे स्वास्थ्य को पहला धन माना गया है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय कई वर्षों तक धनतेरस के दिन ही आयुर्वेद दिवस मनाता रहा; बाद में इसके लिए सितंबर की एक तय तारीख़ रखी गई।

इस शाम तीन प्रार्थनाएँ एक साथ होती हैं। स्थिर समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है, और आरोग्य के लिए धन्वंतरि की। यमराज के लिए एक दीपक घर के बाहर रखा जाता है, इस प्रार्थना के साथ कि परिवार में किसी की अकाल मृत्यु न हो। घर के लिए कुछ नया ख़रीदना, ख़ासकर धातु की कोई चीज़, इस दिन की सबसे जानी-पहचानी परंपरा है।

धनतेरस की कथा

जब देवताओं और असुरों ने अमृत के लिए क्षीरसागर का मंथन किया, तब अमृत से पहले समुद्र से कई रत्न निकले। फिर भगवान विष्णु के अंश माने जाने वाले धन्वंतरि अमृत कलश हाथ में लिए प्रकट हुए। परंपरा मानती है कि आयुर्वेद का ज्ञान संसार को उन्हीं से मिला। कुछ कथाओं में माँ लक्ष्मी का प्राकट्य भी इसी मंथन से, इसी तिथि को बताया गया है। यही एक कारण है कि इस शाम देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर के साथ उनका स्वागत किया जाता है।

एक लोककथा में एक राजकुमार की नवविवाहिता ने रातभर दीये जलाकर जागरण किया और उसे सर्पदंश से बचा लिया। इसी कथा के कारण बहुत से परिवार आज की रात घर की देहरी पर दीपक जलाए रखते हैं।

घर पर धनतेरस पूजा कैसे करें

  1. सफ़ाई पूरी करें और रंगोली बनाएँ दिवाली की सफ़ाई पूरी कर लें, मुख्य द्वार धोएँ और दरवाज़े पर रंगोली बनाएँ। कुछ परिवार चावल के घोल और कुमकुम से द्वार पर माँ लक्ष्मी के चरण भी बनाते हैं।
  2. नई ख़रीदारी घर लाएँ दिन में बर्तन, सिक्का या झाड़ू ख़रीदें और उसे पूजा स्थान के पास रख दें। कुछ परिवार नई झाड़ू को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले उसकी छोटी-सी पूजा करते हैं।
  3. पूजा की चौकी सजाएँ साफ़ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ और उस पर माँ लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर की प्रतिमा या चित्र रखें। धन्वंतरि का चित्र हो तो उसे भी रखें। पास में जल से भरा कलश रखें, जिस पर आम के पत्ते लगे हों।
  4. संकल्प लें प्रदोष काल में, ऊपर दिए गए मुहूर्त के भीतर, चौकी की ओर मुख करके बैठें और तीन बार आचमन करें। अपना नाम और अपने परिवार का परिचय देकर घर-परिवार के आरोग्य और समृद्धि का संकल्प लें।
  5. पहले गणेश पूजन करें गणेश जी को कुमकुम, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें और प्रार्थना करें कि पूजा निर्विघ्न संपन्न हो।
  6. धन्वंतरि पूजन करें चंदन, फूल, धूप और घी का दीपक अर्पित करें, फिर मिठाई, दूध या दही का नैवेद्य चढ़ाएँ। घर के हर सदस्य के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
  7. लक्ष्मी-कुबेर पूजन करें कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप और घी का दीपक अर्पित करें। उनके सामने सिक्के, गहने या आज की नई ख़रीदारी रखें, और मिठाई, बताशे या खील का भोग लगाएँ।
  8. यम दीपदान करें यमराज के नाम का दीपक जलाएँ और उसे मुख्य द्वार के बाहर इस तरह रखें कि लौ दक्षिण दिशा की ओर रहे। इसकी पूरी विधि नीचे दी गई है।
  9. आरती और प्रसाद माँ लक्ष्मी की आरती करें, पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें और परिवार में प्रसाद बाँटें।
  10. घर को दीयों से रोशन करें मुख्य द्वार, खिड़कियों और रसोई में दीये रखें, और एक दीपक पूजा स्थान के पास रातभर जलने दें। दीयों को पर्दों से दूर और बच्चों की पहुँच से बाहर रखें।

धनतेरस पूजा सामग्री

  • माँ लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर की प्रतिमा या चित्र
  • धन्वंतरि का चित्र (वैकल्पिक)
  • लकड़ी की चौकी और लाल कपड़ा
  • जल से भरा कलश और आम के पत्ते
  • मिट्टी के दीये, घी या तिल का तेल और रुई की बत्तियाँ
  • यम दीपदान के लिए मिट्टी या आटे का दीपक
  • कुमकुम, हल्दी और चंदन
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • फूल और गेंदे की माला
  • दूर्वा
  • अगरबत्ती और कपूर
  • नैवेद्य के लिए मिठाई, बताशे और खील
  • धन्वंतरि के लिए दूध या दही
  • साबुत धनिया और गुड़ (महाराष्ट्रीय घरों में)
  • पान के पत्ते और सुपारी
  • सिक्के, गहने या आज की नई ख़रीदारी
  • रंगोली के लिए चावल का आटा और रंग

क्षेत्रीय परंपराएँ

महाराष्ट्र
साबुत धनिये को हल्का कूटकर गुड़ के साथ नैवेद्य में चढ़ाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।
तमिलनाडु
कुछ पारंपरिक घरों में महिलाएँ इस दिन मरुंदु नाम की जड़ी-बूटियों की औषधि तैयार करती हैं। इसे पूजा में चढ़ाया जाता है और नरक चतुर्दशी की सुबह जल्दी खाया जाता है।
आयुर्वेद के वैद्य
वैद्य, आयुर्वेदिक महाविद्यालय और चिकित्सालय इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाते हैं और उन्हें अपनी चिकित्सा परंपरा के अधिष्ठाता के रूप में पूजते हैं।
जैन समाज
कुछ जैन समुदाय इस दिन को धन्यतेरस, यानी शुभ त्रयोदशी कहते हैं और इसे दिवाली पर भगवान महावीर के निर्वाण से पहले के अंतिम दिनों से जोड़ते हैं।

धनतेरस पर क्या ख़रीदें

धनतेरस पर कुछ नया ख़रीदना उस दिन घर में नया धन लाने का प्रतीक है, जिस दिन दिवाली के लिए पहली बार माँ लक्ष्मी का स्वागत होता है। परिवार आम तौर पर ऐसी चीज़ें चुनते हैं जो टिकाऊ हों और घर में काम आएँ। धनतेरस पर क्या ख़रीदें, इस पर हमारी अलग मार्गदर्शिका में हर चीज़ के बारे में विस्तार से बताया गया है।

  • सोना या चाँदी, गहने के रूप में या लक्ष्मी-गणेश अंकित सिक्के के रूप में, जिसे पूजा में रखा जा सके।
  • रसोई के लिए पीतल, ताँबे या चाँदी के बर्तन, जो लंबे समय से भरे-पूरे घर का प्रतीक माने जाते हैं।
  • नई झाड़ू, एक छोटी-सी ख़रीदारी जो दरिद्रता को बुहारकर बाहर करने और माँ लक्ष्मी के लिए घर स्वच्छ रखने से जुड़ी है।
  • दो दिन बाद होने वाली दिवाली की मुख्य पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा।
  • गोमती चक्र, जिसे कुछ परिवार अपने क़ीमती सामान के साथ रखते हैं।
  • गाड़ी या घरेलू उपकरण जैसी बड़ी ख़रीदारी, जिसे बहुत से लोग इसी दिन के लिए रखते हैं।
  • अगर हाथ तंग हो, तो एक झाड़ू या पीतल की एक छोटी चीज़ काफ़ी है। यह परंपरा स्वागत की है, ख़र्च की नहीं।

धनतेरस पर क्या न ख़रीदें

ये शास्त्रीय नियम नहीं, लोक मान्यताएँ हैं, और हर परिवार में अलग-अलग चलन है। अगर आपके घर की अपनी कोई परंपरा है, तो उसी का पालन करें।

  • लोहे की चीज़ें, और बहुत से घरों में स्टील भी, क्योंकि उसे लोहे का ही रूप माना जाता है।
  • चाकू और कैंची जैसी धारदार चीज़ें।
  • काँच की चीज़ें और आईना।
  • काले रंग की चीज़ें और काले कपड़े।
  • प्लास्टिक, या कोई भी टूटी या चटकी हुई चीज़।
  • इस दिन तेल या घी ख़रीदना।
  • उधार देना या कर्ज़ चुकाना, क्योंकि कुछ लोग मानते हैं कि इससे धन घर से बाहर जाता है।

यम दीपदान

यम दीपदान, जिसे यम दीपम भी कहते हैं, धनतेरस की शाम मृत्यु के देवता यमराज को अर्पित किया जाने वाला दीपक है। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी हैं, इसलिए यह दीपक मुख्य द्वार के बाहर इस तरह रखा जाता है कि उसकी लौ दक्षिण की ओर रहे। इसके पीछे की प्रार्थना सीधी है: परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा हो।

विधि हर घर में थोड़ी अलग होती है। बहुत से लोग मिट्टी या आटे का एक दीपक तेल भरकर जलाते हैं, तो कुछ तेरह दीपक जलाते हैं। धनतेरस के तेरह दीयों पर हमारा लेख इस परंपरा को समझाता है। बहुत से लोग चतुर्दशी की शाम भी यमराज के लिए एक और दीपक जलाते हैं।

इसे सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में, मुख्य पूजा के आसपास जलाएँ। दक्षिण की ओर मुख करके हाथ जोड़ें और यमराज से घर-परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें। दीपक ऐसी जगह रखें जहाँ वह गिर न सके, और उसे अपने आप बुझने दें।

धनतेरस की तिथियाँ

धनतेरस की तिथियाँ
दिनतारीख
शुक्रवार6 नवंबर 2026
बुधवार27 अक्टूबर 2027

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस 2026 का समय क्या है?

प्रदोष काल, यम दीपदान: शाम 5:42 – रात 8:18; ख़रीदारी के चौघड़िया (शुभ): दोपहर 12:11 – दोपहर 1:34; ख़रीदारी के चौघड़िया (चर): शाम 4:20 – शाम 5:42; ख़रीदारी के चौघड़िया (लाभ): रात 8:57 – रात 10:34। समय उज्जैन के लिए IST में हैं।

धनतेरस पर किन देवताओं की पूजा होती है?

समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी और कुबेर की, और स्वास्थ्य के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है। हर पूजा की तरह शुरुआत गणेश जी से होती है। यमराज के लिए एक अलग दीपक द्वार के बाहर रखा जाता है।

क्या धनतेरस और धन्वंतरि जयंती एक ही दिन हैं?

दोनों एक ही तिथि को पड़ते हैं, दिवाली से पहले के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को। धनतेरस धन का घरेलू पर्व और दिवाली का पहला दिन है। धन्वंतरि जयंती आयुर्वेद के देवता का जन्मोत्सव है, जो इसी दिन मनाया जाता है।

धनतेरस पर झाड़ू क्यों ख़रीदते हैं?

झाड़ू से घर साफ़ रहता है, और माना जाता है कि स्वच्छ घर में माँ लक्ष्मी आती हैं। धनतेरस पर नई झाड़ू ख़रीदना दरिद्रता और चिंता को बुहारकर बाहर करने का प्रतीक है। नया कुछ ख़रीदने की परंपरा निभाने का यह एक किफ़ायती तरीका भी है।

क्या धनतेरस पर स्टील के बर्तन ख़रीद सकते हैं?

यह परिवार-परिवार पर निर्भर है। बहुत से लोग स्टील नहीं ख़रीदते, क्योंकि वह लोहे का ही रूप है और इस दिन लोहा अशुभ माना जाता है। दूसरे लोग बिना किसी चिंता के स्टेनलेस स्टील ख़रीदते हैं। सावधानी रखनी हो, तो पीतल, ताँबा या चाँदी चुनें।

क्या धनतेरस पर सोना ख़रीदना ज़रूरी है?

नहीं। सोना-चाँदी लोकप्रिय हैं, पर कोई नियम इन्हें अनिवार्य नहीं बनाता। सच्चे मन की प्रार्थना के साथ ख़रीदा गया पीतल का बर्तन, झाड़ू या दीया भी परंपरा को उतने ही अच्छे से निभाता है।

धनतेरस कब है और किस तिथि को मनाई जाती है?

धनतेरस दिवाली से ठीक पहले के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है और पाँच दिन के दीपोत्सव का पहला दिन है। दिवाली की मुख्य लक्ष्मी पूजा इसके दो दिन बाद होती है। इस साल की तारीख़ और पूजा का शुभ मुहूर्त इस पेज पर ऊपर दिया गया है।

धनतेरस की पूजा किस समय करनी चाहिए?

धनतेरस की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। यम दीपदान भी इसी समय, मुख्य पूजा के आसपास किया जाता है। इस साल का पूजा मुहूर्त ऊपर की तालिका में देखें।

धनतेरस पर यम का दीपक किस दिशा में रखें?

यम का दीपक मुख्य द्वार के बाहर रखें और उसकी लौ दक्षिण दिशा की ओर रखें, क्योंकि यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं।

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